कहानी का कार्यक्षेत्र

2018

पानी और मैं।

GSSS TANDA LEARNING LINKS FOUNDTION

Rajasthan

गुरु

ANURAG MATHUR

छात्रों

Hori Lal Group,

Step 1 महसूस करें

1. बैठने के लिए दरी पट्टी का भाव 2. विद्यालय भवन में बिजली नहीं है 3. प्रार्थना स्थल समतल नहीं है 4. विद्यालय की पिछली बाउंड्री पर गेट नहीं है 5. व्यर्थ बहता पानी

घरों की टंकियों में ओवरफ्लो होकर काफी पानी बर्बाद होता है। इस समस्या कि और छात्र होरीलाल ने सबका ध्यान आकर्षित किया। इस समस्या को उसके साथियों द्वारा सर्वाधिक महत्व दिया गया। इसके समाधान का प्रयास भी जल्दी से जल्दी करने के लिए सभी विद्यार्थी एकजुट हुए।

इस समस्या से छात्र होरीलाल और उसका ग्रुप सर्वाधिक रूप से प्रभावित हुआ उन्होंने विद्यालय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में जल संरक्षण पर कई बार अपने विचार प्रस्तुत किए थे मगर उन्हें यह चिंता थी कि क्या वास्तव में पानी का संरक्षण किया जाता है इसलिए बहते पानी को रोकना उनकी मुख्य चिंता बन गई।

Step 2 Imagine

1. छात्र होरीलाल ने इसके लिए वाटर लेवल बनाने का निश्चय किया। 2. अपने साथियों की मदद से प्लास्टिक के चार के ढक्कन को इकट्ठा किया। 3. पीवीसी पाइप के टुकड़े कभी इकट्ठा किया गया 4. वायर, बैटरी और एलएलएफ आरपी अनुराग माथुर से बजर लाने के लिए कहा और वाटर लेवल नामक यंत्र बनाया।

जब छात्र होरीलाल ने पानी के दुरुपयोग को रोकने की बात अपने साथियों और एल एल एफ आर पी से की तो उसे पूर्ण सहयोग करते हुए उसका साथ दिया। 2 से 3 मॉडल तैयार करके उससे गांव वालों को उनके घरों की टंकियों में लगाने के लिए प्रेरित किया गया और पानी के महत्व को भी समझाया गया।

Step 3करना

कक्षा के सभी विद्यार्थियों ने अपनी समस्या को एक एक करके बोला और उसके बाद चर्चा में यह महसूस किया कि सभी समस्याओं से महत्वपूर्ण समस्या पानी के दुरुपयोग को रोकना है। टंकी के ओवरफ्लो होने से काफी पानी बर्बाद होता है राजस्थान के कई इलाके ऐसे हैं जो पूर्ण रूप से सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं। छात्र होरीलाल ने कबाड़ से जुगाड़ करके वाटर लेवल नामक यंत्र बनाया। इस सराहनीय प्रयास के लिए छात्र होरीलाल को एसडीएम धौलपुर ने सम्मानित भी किया।

इस प्रोजेक्ट का सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि बच्चों की मेहनत रंग लाई। उनके वाटर लेवल को अधिकतर लोगों ने पसंद करते हुए उसे अपने घरों में लगाने की बात कही जून माह में चल रही दैनिक भास्कर की मुहिम जलमित्र में होरीलाल को महत्वपूर्ण स्थान मिला।

स्कूल स्टाफ के साथ साथ स्कूल कि अन्य कक्षाएं व ग्राम से सदस्य मुख्य रूप से प्रभावित हुए

यह प्रोजेक्ट बहुत ही अच्छा है। इस तरह से बच्चों में नई सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा मिला और उनकी क्षमता विकसित हुई ऐसे प्रोजेक्ट छात्र-छात्राओं को पूर्ण अधिकार के साथ दिए जाए तो यह उनके लिए हितकारी होगा। वस्तुओं के रीसायकल से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

रारंभ में प्रोजेक्ट के मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को समझ में नहीं आ रहे थे जब उन्हें मालूम पड़ा कि इस प्रोजेक्ट का लाभ उन्हें ही होगा उन्होंने अपनी आसपास की समस्याओं को चुनना प्रारंभ किया और रुचि ली। लेकिन वही समस्या उन्हें भी थी कि वह अपने संस्था प्रधान महोदय अपने अन्य विद्यार्थियों को और ग्राम वासियों को इसे किस प्रकार से समझाएं इसके लिए उन्होंने कई प्रकार के प्रयास किए आखिरकार उन्हें सफलता मिली।

15-30 दिन

स्वच्छ पानी और स्वच्छता

छात्र व्यर्थ बहते पानी को रोकना चाहते थे उनका मानना था की सर्वाधिक रूप से ओवरफ्लो के द्वारा काफी पानी बर्बाद होता है और नीचे जमे पानी में मख्खी मछ्छर रोगों को न्योता देते है । अगर उन्हें रोका जाए तो काफी पानी बचेगा स्वच्छता भी रहेगी कबाड़ से जुगाड़ करके रीसायकल के रूप में पुरानी वस्तुओं को इस्तेमाल किया और और वाटर लेवल नामक यंत्र बनाया|

Step 4 साझा करें

छात्र-छात्राओं से चर्चा करके HM सर के साथ मीटिंग की अनुमति लेकर इस प्रोजेक्ट के लाभ गिना कर इसे लागू करवाया। छात्र-छात्राओं के सहयोग से आर पी अनुराग माथुर ने कम्युनिटी को जल संरक्षण का महत्व समझाते हुए छात्र होरी लाल के वाटर लेवल यंत्र को देखने के लिए कहा गांव वालों ने उसके यंत्र को देखने के बाद सहयोग करने की बात कही है सदस्यों ने इस प्रकार की योजना को बहुत ही उत्तम बताया।

100 से अधिक

छात्र-छात्राओं अध्यापक व प्रिंसिपल सर से बातचीत कमेटी की अधिकांश लोग जो कि सजग है उनसे बातचीत करके इसे प्रभावशाली बनाए रखने का पूर्ण प्रयास किया जाएगा।