कहानी का कार्यक्षेत्र

2018

हमारा प्रयास सबका विकास भाग-2

Satya Bharti School Sikanderpur Mahmood

Uttar Pradesh

गुरु

अतुल कुमार

छात्रों

शिफा,नाज़िया,ऐमन अंसारी,इक़रा,अर्फ़ी,असरा,सचिन,जुनैद,रितेश,फ़ायज़ा, अल्फ़ी,आतिफ,अना,असद,,

Step 1 महसूस करें

हम ने अपने विद्यालय व उसके आसपास की कई समस्याओं का अनुभव किया जो हमें परेशान करती थी इन समस्याओं में अशिक्षा गरीबी टूटी सड़कें पेयजल विद्यालय में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति आसपास गंदगी इत्यादि प्रमुख थे ।

हमने इन समस्याओं पर आपस में समूह में चर्चा करने के उपरांत या निर्णय लिया कि इन समस्याओं में सबसे अधिक विद्यालय में विद्यार्थियों की कम होती हुई उपस्थिति एक गंभीर समस्या बन चुकी है। क्यों कि इसका असर विद्यालय के साथ साथ उन बच्चों पर भी हो रहा था, जो नियमित विद्यालय आते हैं ,इसी कारण शिक्षा व विद्यालय के सुधार हेतु हमने यह समस्या चुनी ।

इस समस्या का सर्वाधिक प्रभाव नियमित विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों पर पड़ा जो की उपस्थिति कम होने से अध्यापक पढ़ाए हुए शीर्षक को समय से आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे ,साथ ही विद्यार्थियों की शिक्षण में रुचि भी कम लग रही थी।

Step 2 कल्पना

हम ने इस समस्या को दूर करने के लिए उन संभावित प्रयास एवं कार्यों की सूची बनाई जिससे इस समस्या को दूर किया जा सकता था। इस समस्या को हल करने के लिए निम्न उपाय करने होंगे। #1 स्कूल के टाइम टेबल में बदलाव कर उसमें गतिविधियों व खेलों के कलांश ज्यादा किए जाए एवं स्कूल ना आने वाले अथवा कम वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से मिलकर उसका कारण जानना एवं उसको दूर करने का प्रयास करना। #2 सभी सम्मानित व जिम्मेदार नागरिकों से सहयोग लेना पी टी एम के माध्यम से अभिभावकों को जागरूक करना एवम् सुबह काम पर जाने वाले बच्चों के लिए अलग से एक सायं कालीन कक्षा को चलाना । #3 रैली व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाना विभिन्न प्रकार के खेल एवं प्रतियोगिता का आयोजन करना जिससे बच्चों के अंदर सा एवं प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने की इच्छा पैदा हो सके।

उक्त सूची के आधार पर हमने अपने समाधान के कार्यान्वयन हेतु अभिभावको के घर जाकर उन्हे अपने बच्चो को नियमित विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया।इसके अतिरिक्त विद्यालय मे खेल व प्रतियोगिताओ को बढावा देने के साथ साथ वह उपाय जो प्रत्यक्ष रूप से विदयाथियो की संख्या को बढा सकते है किया गया।क्योकि यह कम समय मे अधिक प्रभावशाली होगे।

Step 3करना

हमने इन उपायों में से सबसे ज्यादा प्रभावित करने एवं उपस्थिति बढ़ाने वाले कारकों पर कार्य करना प्रारंभ किया जो निम्न वत है 2-विद्यालय के टाइमटेबल को लचीला कर अपने अध्यापकों की सहायता से उस पर कार्य किया टाइम टेबल में अधिक से अधिक खेलो एवं गतिविधियों का समावेश किया साथ ही हमने अपने प्रयासों से उन्हें मनाया और बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने का निवेदन किया । 3-जो बच्चे किसी काम की वजह से नियमित विद्यालय नहीं आ पाते थे उनके लिए हमने अपने अध्यापकों व ग्राम सरपंच की सहायता से सायन के समय शाम के समय एक अतिरिक्त कक्षा की व्यवस्था की । 4- नए खेल व प्रतियोगिताओं को टाइम टेबल के अनुसार व्यवस्थित किया एवं उनके लिए हमने अपने अध्यापकों की सहायता ली।

म :- आरम्भ में तो लोगों ने कहा की यह एक निरर्थक प्रयास है किंतु बच्चों के दृढ़ निश्चय के सामने वह फीका पड़ा, और बच्चों ने अपने अथक् प्रयास से इस महान कार्य को निष्पादित किया गया, जब अभिभावकों के घरों एवं p.t.m. में हमारे विद्यालय की डीएफसी टीम ने उन्हें प्रेरित किया, तब वे सभी इस महान कार्य के लिए एवं सहयोग के लिए तैयार हो पाए

500 -700

प्रभावित लोगों ने इस समस्या की हानियों के बारे में जाना तो उन्होंने बच्चों के प्रयास की सराहना करते हुए निम्नलिखित कथन कहे हमारा बच्चा अब रोज स्कूल जा रहा है बच्चों का प्रयास सराहनीय है हम बच्चों को सिखाते हैं लेकिन आप इन बच्चों हम इन बच्चों को सिखाते हैं लेकिन आज इन बच्चों ने हमें बहुत कुछ सिखा दिया बच्चों के प्रयास से स्कूल का वातावरण पहले से बहुत अच्छा हो गया है ।

इस प्रोजेक्ट को लागू करते समय हमें विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा हमारी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी क्योंकि हम अपने प्रयासों पर कार्य कर रहे थे कुछ लोगों ने सहयोग नहीं दिया। हमारे तरफ से ग्रुप अध्यापकों के सहयोग के कारण या पूरा अभियान सफल हो पाया पीटीएम में अभिभावकों समझाया एवं उन्हें इसके प्रति जागरूक होने के का निवेदन भी किया, कहीं पर काम पर जाने वाले बच्चों के लिए सायं कालीन कक्षा को शुरू करवाया ,यह उपाय हमने इसलिए अपना एक क्योंकि इसमें हम समुदाय व अभिभावकों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़कर इस अभियान को सफल बनाना चाहते थे ,उक्त सूची के आधार पर अभिभावकों के द्वारा हमें बहुत सहयोग मिला ।

15-30 दिन

श्रेष्ठ शिक्षा

क्योकि हमे लगता है कि यदि विद्यार्थी विद्यालय मे प्रतिदिन पढ़ने नही आएंगे तो उनका सामाजिक व आथिर्क विकास भी नही हो पाएगा तथा वे उन बच्चो की तुलना मे और अधिक पिछड़ जायेगे जो नियमित विद्यालय आते है।अतः श्रेष्ठ शिक्षा के लिए विदयाथियो को नियमित विद्यालय आना चाहिए ।

Step 4 साझा करें

अपने प्रोजेक्ट को हमने अपने स्कूल में पीटीएम एवं विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से निष्पादित किया तथा नुक्कड़ नाटक व रैली के माध्यम से उन लोगों तक अपनी समस्या पहुंचाई एवं उसका निराकरण किया जो इस समस्या से कभी ना तो अवगत थे और ना ही इस समस्या की गंभीरता को समझ पाए थे हमारी प्रशंसा गांव के ग्राम प्रधान एवं विशिष्ट सम्मानित नागरिकों ने किया और उन्होंने हमारे इस छोटे से कार्य की बहुत सराहना की तथा इस तरीके के कार्य अन्य विद्यालयों में भी निष्पादित करने का उन्होंने आग्रह किया वह बच्चे जो स्कूल नहीं आ रहे थे उन्होंने स्कूल आना शुरू कर दिया और पढ़ाई के प्रति अपनी रुचि दिखाई।

100 से अधिक

इस प्रोजेक्ट को लम्बे समय तक प्रभावशाली बनाए रखने के लिए हम अपनी कमेटी व अध्यापको के सहयोग के दारा समय समय पर क्षेत्र भ्रमण कर लोगो को जागरूक करते रहेंगे व विद्यालय न आने वाले बच्चो के परिवारो को और अधिक प्रेरित कर उनकी समस्याओ को दूर करने का प्रयास करेंगे। इस दौरान अपने विद्यालय का माहौल और भी श्रेष्ठ बनाएंगे।